Ikkis Movie Review in Hindi: ख़ामोशी से सच्चाई दिखाती है स्वर्गीय धर्मेंद्र की अंतिम वॉर फिल्म

By Dr. Santosh Kumar Sain

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Ikkis Movie Review: बॉलीवुड में युद्ध विशेषकर भारत पाकिस्तान की जंग पर आधारित फिल्में अक्सर धमाकेदार एक्शन और जोरदार बैकग्राउंड म्यूजिक से भरी होती हैं, लेकिन इक्कीस कुछ अलग ही तरह की कहानी प्रस्तुत करती है। यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है, जो सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जिंदगी सेप्रेरित है। लेकिन यहां केंद्र में सिर्फ जंग की जीत-हार नहीं, बल्कि एक जवान ऑफिसर के मानसिक सफर पर है – जब देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी कंधों पर आ जाए।

कहानी में दो टाइमलाइन्स – 1971 की तनावपूर्ण जंग और 2001 की यादों से भरी दुनिया – को भावनात्मक रूप से जोड़ती कहानी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी। क्या जंग खत्म होने के बाद इंसान के अंदर क्या बाकी रह जाता है? इक्कीस मूवी रिव्यू में हम बताते हैं क्यों यह फिल्म स्पेशल है!

Ikkis Movie Review

Ikkis Movie Story: बिना अतरिक्त शोर शराबे की कहानी

फिल्म की शुरुआत 1971 के युद्ध (भारत-पाकिस्तान) के खौफनाक दृश्य से होती है, जहां अगस्त्य नंदा का किरदार अरुण खेत्रपाल एक युवा सैन्य अधिकारी के तौर पर उलझनों, भय और आत्मविश्वास के बीच झूलता नजर आता है। दूसरी तरफ, 2001 में जंग की यादें अभी भी ताजा हैं। श्रीराम राघवन ने बिना किसी जबरदस्ती के पैट्रियॉटिज्म (देश प्रेम) के, इंसानी रिश्तों पर फिल्म को केंद्रित किया है।

सीन छोटे-छोटे भावनात्मक पलों से जुड़े हैं – जैसे बूढ़े सिपाहियों की बातचीत या फैमिली के खामोश संघर्ष। कोई लंबा-चौड़ा ड्रामा नहीं, बस वास्तविक एहसास जो दिल को छू जाते हैं। स्पॉइलर फ्री कहें तो: यह फिल्म जंग को ‘शोर’ नहीं बनाती, बल्कि इंसानों की वास्तविक कहानी बताती है – बहादुरी, नुकसान और यादों की।

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Ikkis Movie Casting: अगस्त्य नंदा का डेब्यू, धर्मेंद्र को भावुक श्रद्धांजलि

Agastya Nanda
  • अगस्त्य नंदा (अरुण खेत्रपाल): अगस्त्य ने भय, भ्रमित और बहादुरी को इतना वास्तविक निभाया है कि लगता है वे खुद वास्तविक जंग लड़ रहे हैं। बच्चन परिवार का यह नया चेहरा बॉलीवुड के लिए एकदम तैयार है।
  • धर्मेंद्र: फिल्म की आत्मा, उनकी आंखों और शारीरिक भाव से दर्द और गर्व झलकता है। काम संवाद के बावजूद, हर सीन इमोशनल हो जाता है। हालाँकि फिल्म की रिलीज से पहले धर्मेंद्र दुनियां को अलविदा कह गए, मगर यह फिल्म उनको सच्ची श्रद्धांजलि देती है।
    • Dharmendra Death
  • जयदीप अहलावत: सशक्त और भावनातक रोल में कमाल। धर्मेंद्र के साथ उनके सीन याद रह जाएंगे।
  • सिमरन भाटिया: डेब्यू एक्ट्रेस ने लिमिटेड स्क्रीन टाइम में भी सॉफ्ट इमोशनल टच दिया। ताजा चेहरा!
Agastya Nanda – Simar Bhatia chemistry

निर्देशन और तकनिकी पक्ष

श्रीराम राघवन ने नियंत्रित दृष्टिकोण अपनाया – न तेज रफ़्तार, ना ही युद्ध का शोरगुल। वे दर्शकों पर भरोसा करते हैं, लड़ाई के सीन करने की बजाय महशूस करवाते हैं। फिल्म दिखाती है कि खामोशी का इस्तेमाल असरदार होता है।

  • सिनेमेटोग्राफी (छायांकन): युद्ध का वास्तविक अहसास, टैंक बैटल्स को जमीनी आधार देते हुए।
  • म्यूजिक एंड साउंड: संयमित बैकग्राउंड स्कोर- वॉर में लाउड, इमोशंस में लाइट। साउंड डिजाइन वॉइसेज को हाइलाइट करता है।
  • VFX एंड एडिटिंग: प्रैक्टिकल VFX से टैंक वॉर रियल लगती है, एडिटिंग स्मूथ टाइमलाइन्स कनेक्ट करती है।

Ikkis Movie Review: क्यों देखें इक्कीस?

अगर आप वॉर फिल्म्स में सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि मानवीय कहानी ढूंढते हैं, तो इक्कीस मिस न करें। यह बहादुरी, लॉस और मेमोरीज की बात करती है। खासकर धर्मेंद्र फैंस के लिए इमोशनल राइड। थिएटर्स में जाइए, क्योंकि यह सिल्वर स्क्रीन पर ही फुल जस्टिस देगी। हो सकता है यह आपको धीमी लगे लेकिन मानवीय संवेदनाओं को उकेरती है।

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Dr. Santosh Kumar Sain

My name is Dr Santosh Kumar Sain and I am a Government Teacher. I am fond of writing and through this blog I will introduce you to the biographies of famous women.

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