Savitribai Phule Jayanti 2026: आज, 3 जनवरी 2026 को, भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले जयंती के अवसर पर पूरे भारत में उनकी स्मृति को नमन किया जा रहा है। सावित्रीबाई फुले, जिन्हें भारत की प्रथम महिला शिक्षिका और समाज सुधारक के रूप में जाना जाता है, ने 19वीं शताब्दी में महिलाओं के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। उनके अथक प्रयासों ने न केवल लड़कियों को किताबों तक पहुंच दिलाई, बल्कि जातिवाद, छुआछूत और पितृसत्ता जैसी कुरीतियों के खिलाफ एक क्रांति की नींव रखी।
इस लेख में हम उनके जीवन, योगदान और शिक्षा पर 25 चुनिंदा उद्धरणों पर चर्चा करेंगे, जो आज भी भारत की युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हैं।

Savitribai Phule Intro: सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय
सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। मात्र 9 वर्ष की आयु में उनका विवाह ज्योतिराव फुले से हुआ, जो स्वयं एक प्रमुख समाज सुधारक थे। सावित्रीबाई को प्रारम्भिक औपचारिक शिक्षा नहीं मिली, लेकिन ज्योतिराव ने उन्हें घर पर पढ़ाया। 1848 में, उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए भारत का पहला स्कूल स्थापित किया, जहां वे स्वयं शिक्षिका बनीं। यह कदम उस समय के रूढ़िवादी समाज के लिए एक खुला विद्रोह था, जहां महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था।
उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। स्कूल जाते समय उन पर पत्थर फेंके जाते, गंदगी उछाली जाती, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 1852 में उन्होंने विधवाओं के लिए आश्रम खोला और 1897 में प्लेग महामारी के दौरान मरीजों की सेवा करते हुए अपना जीवन समर्पित कर दिया। सावित्रीबाई एक कवयित्री भी थीं, जिनकी रचनाएं ‘काव्यफुले’ में संकलित हैं। उनकी मृत्यु 10 मार्च 1897 को हुई, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।
शिक्षा में सावित्रीबाई फुले का अमूल्य योगदान
सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को मात्र साक्षरता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का हथियार बनाया। 1848 से 1851 के बीच उन्होंने पुणे में 18 स्कूल स्थापित किए, जहां निम्न वर्ग की लड़कियों को मुफ्त शिक्षा दी जाती थी। उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह और विधवा उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई। ज्योतिराव के साथ मिलकर उन्होंने ‘सत्यशोधक समाज‘ की स्थापना की, जो समानता पर आधारित था।
आज के संदर्भ में, उनका योगदान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में लड़कियों की शिक्षा पर जोर और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ‘ अभियान में झलकता है। दृष्टि आईएएस के अनुसार, सावित्रीबाई ने साबित किया कि शिक्षा लिंग और जाति की सीमाओं को तोड़ सकती है। उनके प्रयासों से हजारों महिलाएं शिक्षित हुईं, जो आज के भारत में STEM शिक्षा और महिला नेतृत्व की प्रेरणा हैं।

सावित्रीबाई फुले जयंती 2026: शिक्षा पर 25 शक्तिशाली उद्धरण (हिंदी अनुवाद सहित)
सावित्रीबाई के उद्धरण कालातीत हैं। नीचे विश्वसनीय स्रोतों से संकलित 25 उद्धरण दिए गए हैं, जो शिक्षा को मुक्ति का माध्यम बताते हैं। प्रत्येक उद्धरण के साथ संक्षिप्त व्याख्या जोड़ी गई है ताकि यह अधिक मूल्यवान बने।

- “शिक्षा ही अज्ञानता के विरुद्ध सबसे मजबूत हथियार है।”
(Education is the best weapon against ignorance.) – यह उद्धरण बताता है कि शिक्षा अंधविश्वासों को दूर करती है। - “सबसे पहले खुद को शिक्षित करो, फिर दूसरों को।”
(You should educate yourself first before you educate someone else.) – शिक्षक बनने से पहले स्वयं सीखने की प्रेरणा। - “शिक्षा भविष्य का मार्ग है, सफलता की सीधी सड़क नहीं।”
(Education is the path to the future, not a straight road to success.) – धैर्य और निरंतरता पर जोर। - “शिक्षा सभी भयों के विरुद्ध आश्वासन है।”
(Education is an assurance against all your fears.) – ज्ञान भय को समाप्त करता है। - “जितना अधिक जानोगे, उतना कम डरोगे।”
(The more you know, the less likely you are to be afraid.) – जागरूकता की शक्ति। - “अज्ञानता ही पशुता है; ज्ञान से ही मनुष्य उन्नत होता है।”
(The lack of learning is nothing but gross bestiality.) – शिक्षा मानवता का आधार। - “शिक्षा महान समानकर्ता है।”
(Education is the great equalizer.) – समानता का मूल मंत्र। - “बिना शिक्षा वाली स्त्री बरगद के पेड़ की तरह है, जिसके न जड़ें न पत्तियां; वह न तो बच्चों को पाल सकती है न खुद जीवित रह सकती है।”
(A woman without education is like a banyan tree without roots or leaves.) – महिलाओं के लिए विशेष प्रेरणा। - “आलस्य गरीबी का लक्षण है; यह ज्ञान, धन और सम्मान का शत्रु है।”
(Laziness is a symptom of poverty.) – मेहनत की महत्ता। - “शिक्षा सीखना कैसे सीखना है, इसका प्रक्रिया है।”
(Education is a process of learning how to learn.) – आजीवन शिक्षा। - “शिक्षा मनुष्यों को बुद्धिमान बनाती है; अज्ञानता उन्हें मूर्ख।”
(Education is what makes men intelligent; ignorance is what makes them stupid.) – बुद्धि विकास। - “शिक्षा हमें गुफाओं से बाहर ले जाएगी।”
(Education is the great equaliser and it will take us out of our caves.) – प्रगति का प्रतीक। - “शिक्षा ही एकमात्र उपाय है जो हमारी सभी बुराइयों का इलाज करेगी।”
(Education is the only remedy for all that is wrong with us.) – सामाजिक चिकित्सा। - “सोचना कैसे सीखना है, इसके लिए किताबें पढ़ो।”
(To learn how to think, read books.) – पढ़ाई का महत्व। - “हम विजयी होंगे और भविष्य हमारा होगा।”
(We shall overcome and success will be ours in the future.) – आशावाद। - “शिक्षा मुक्ति और सशक्तिकरण का मार्ग है।”
(Education is the path to liberation and empowerment.) – महिला सशक्तिकरण। - “स्त्रियों के अधिकार दान में नहीं मिलते, उन्हें जीता जाता है।”
(Women’s rights are not a gift; they are won.) – संघर्ष की याद। - “शिक्षा ही एकमात्र मापदंड होनी चाहिए।”
(Education should be the only yardstick.) – मूल्यांकन का आधार। - “शिक्षा दुनिया बदलने का सबसे शक्तिशाली हथियार है।”
(Education is the most powerful weapon which you can use to change the world.) – वैश्विक परिवर्तन। - “बैठे रहना छोड़ो, शिक्षा प्राप्त करो।”
(Sit idle no more. Go get education.) – कार्रवाई की पुकार। - “ज्ञान के बिना कोई शिक्षा नहीं।”
(If you have no knowledge, have no education.) – मूल सत्य। - “शिक्षा समाज को बदलने का हथियार है।”
(Education is the most powerful weapon to change the whole community.) – सामूहिक परिवर्तन। - “स्त्री शिक्षा के बिना समाज अधूरा है।”
(Without women’s education, society is incomplete.) – आधुनिक प्रासंगिकता। - “शिक्षा से ही स्वाभिमान जीतो।”
(Educate to live with self-respect.) – आत्मसम्मान। - “पाठशाला ही इंसानों का सच्चा गहना है।”
(School is the true jewel of humans.) – शिक्षा का सम्मान।

वर्तमान भारत में सावित्रीबाई फुले की प्रासंगिकता
2026 में, जब भारत डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया की दिशा में अग्रसर है, सावित्रीबाई के विचार ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की ड्रॉपआउट दर (30% से अधिक) जैसी समस्याओं को संबोधित करते हैं। उनके अनुसार, शिक्षा लैंगिक असमानता को समाप्त कर सकती है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला साक्षरता दर 70% पहुंच गई है, लेकिन गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है। सावित्रीबाई जयंती पर, स्कूलों में उनके उद्धरणों को शामिल कर नई पीढ़ी को प्रेरित किया जा सकता है।
यह भी पढ़िए: Mayawati Biography in Hindi | मायावती की जीवनी: जन्मदिन, आयु, परिवार, मुख्यमंत्री कार्यकाल
सावित्रीबाई फुले जयंती 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
सावित्रीबाई फुले जयंती कब मनाई जाती है?
3 जनवरी को, उनके जन्मदिन पर।
सावित्रीबाई फुले ने पहला स्कूल कब खोला?
1848 में पुणे में।
सावित्रीबाई फुले के प्रमुख उद्धरण क्या हैं?
“शिक्षा ही अज्ञानता के विरुद्ध सबसे मजबूत हथियार है।”
सावित्रीबाई फुले का शिक्षा में योगदान क्या था?
महिलाओं और निम्न वर्ग के लिए मुफ्त स्कूल और आश्रम।
आज सावित्रीबाई फुले क्यों प्रासंगिक हैं?
महिला सशक्तिकरण और समान शिक्षा के लिए।








